करुणासागर ग्रंथ क्या है ?

 

।। श्री राम ।।



करुणासागर क्या है ?

विक्रम संवत 1836-37 में गुरू महाराज से आज्ञा लेकर श्री द्यालजी महाराज ने गिरिवर एकान्त स्थल पर बैठकर भजन साधन चालू् किया । परम तितिसा के साथ सर्दी, गर्मी व वर्षा का प्रहार सहन करते द्यालजी महाराज पर करूणासागर परमात्मा ने एक शिलाखण्ड लाकर इस तरह रख दिया कि वह एकान्त स्थान पूर्वाभिमुख गुफा रूप में परिवर्तित हो गया।

 

आपकी तीव्र साधना से देवराज के मन में खलबली मच गई और देवराज को लगने लगा कि कहीं यह तपस्वी मेरा पद नहीं छीन ले । शंकित इन्द्र ने श्री द्यालजी महाराज की तपस्या भंग करने हेतु अप्सरा को भेजा। अप्सरा ने अपने मोह-मायाजाल से तपस्या तोड़ने के अथक प्रयास किए परन्तु आप तो निरर्निश परमात्मा की साधना में लगे रहे।

 

अंततः अप्सरा ने श्राप दिया कि "तपस्वी तुमने आंखे खोलकर देखा भी नहीं और मेरा अपमान किया इसलिए तेरी आंखे बन्द की बन्द ही रह जावें |" श्राप को मिटाने का सामर्थय रखते हए वे भी आपने देव मर्यादा का सम्मान करते हुए श्राप स्वीकार कर लिया नेत्र ज्योति चली गई। तब गुरुवर श्रीरामदासजी महाराज से विनय कर व आज्ञा पाकर श्री द्यालजी महाराज ने करूणा बोध, करूणा प्रश्नोत्तरी अरदास बत्तीसी व करूणासागर नामक चार ग्रन्थों द्वारा प्रभु से नेत्रपीड़ा निवारणार्थ प्रार्थना की। अन्त में

करूणासागर के द्वारा की गई वीनति से भगवान ने स्वयं प्रकट हो आपके आंखों की पटटी खोल पीड़ा मिटाकर ज्योति प्रदान कर दी । इसके साथ ही आपकी दिव्य दृष्टि खुल गई।

 

ऐसा यह करूणासागर एक चमत्कारिक व प्रासादिक ग्रन्थ है । इसका नियमित पाठ करके हजारो लोग इच्छित फल पा चुके हैं | करूणासागर के अनुष्ठात्मक पाठ के लिए ग्रन्थरक्षा बत्तीसी ग्रन्थ भी इसके प्रारम्भ में दिया गया है।


करुणासागर ग्रंथ क्या है ? 

 

 अथ ब्रह्म स्तुतीं


अथ रक्षा बत्तीसी


ग्रंथ अरदास बत्तीसी


श्री गुरु वन्दन स्तोत्र


सन्ध्या वन्दन (आरती)


रामस्नेही संप्रदाय खेड़ापा के आचार्य।रामस्नेही संप्रदाय खेड़ापा के महाराज।रामस्नेही संप्रदाय खेड़ापा के गुरु।

 

ग्रन्थ करुणा सागर


श्री हनुमान चालीसा – Shree Hanuman Chalisa


भोजन मंत्र – Bhojan Mantra


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