अथ रक्षा बत्तीसी

 

|। रामाय नमः ।।



।। अथ रक्षा बत्तीसी ।।

स्तुति वचन

 

नमो राम गुरुदेवजी, जन त्रिकाल के वन्द।

विध्न हरण मंगल करण, रामदास आनन्द ।।

 

दोहा

राम इष्ट आधार बल, राम आश विश्वास।

राम भेरोसे रमरह्मा, निर्भय रामादास ।।1।।

 

राजतेज नटखट्ट में, मुड़ै न हरिका दास।

चरण कमल छाड़ै नहीं, रहे सत्तगुरु पास ।।2।।

 

कहा दोखी सोखी कहा, कहा देश परदेश ।

रामदास के रामजी, रक्षक सदा हमेश ।।3।।

 

शस्त्र अस्त्र छल छिद्र जो, मूठ मंत्र रिपुघात ।

ब्याल सिंह दामनि दमक, रक्षा राम सुनाथ ।।4।।

 

भवन गवन परबत बनी, अवघट घाट अनेक ।

रामदास के रामजी, आस - पास बल एक ।।5।।


कूप खाड ज्वाला अगनि, निशा चोर भय धाड़।

रामदास के रामजी, अंधधुंध मंद बाड़ ।।6।।


समय काल पावक प्रलय, शीत उष्ण मुरताप।

रामदास के रामजी, रक्षक आपो आप ।।7।।


राहु केतु सूरजसुतन, अवनि पुत्र ग्रहघात ।

विगरी में सखरी करण, तिगरी मेटण तात् ।।8।।


तात मात हित प्रसन्नता, रामदास के राम

सम्रथ प्रतिपालक सदा, खानपान आराम ।।9।।


चिन्ता दीनदयालु को, मो मन सदा आनंद।

जायो सो प्रतिपालसी, रामदास गोविंद ।।10॥


विघ्न विदारण रामजी, आनंद करण अनेक।

रामदास मन वच करम, तारण कारण एक ।।11।।


दिवस मास जोगिनी दशा, गज अंतर कृत सोहि ।

नखत जोग वाहण असम, राम इच्छा सुखमोहि।। 12।।


लगन दुघड़ियो शुभ अशुभ, राम वार व्रतमान ।

दिशाशूल सन्मुख चन्द्र, कहा सांवण पर ज्ञान ।।13।।


ऊठत बैठत जागतां, सोवत सपने माहिं ।

राम धणी प्रेरक सदा, रामदास डर नाहिं ।।14।।


मंडप मंड आधार इक, घट विच आतम राम ।

प्रगट राम रक्षा करण, रामदास विश्राम ।।15।।


सब व्यापक पूरण कला, नमस्कार भगवंत ।

राम इच्छा विचरत जहाँ, रामराय के संत ।।16।।


दशौं दिशा आनंद अगम, चिदानंद भगवान ।

रामदास के रामजी, चितवन जीवन प्रान ।।17।।


स्वर्ग मुत्यु पाताल जो, वा सुर नर अरु नाग ।

रामरक्षा सर्वज्ञ सुदूढ़, रामदास बड़भाग ।।18।।


आधि व्याधि मेटण सकल, अकल अखँडी देव ।

रामदास ता आसरै, सुर विरिचि कर सेव।।19।।


सेव देव मूरति धणी, हरि आचार विचार ।

मंत्र जाप पूजा परम, नित्य निमय गुणसार ।।20।।


तीरथ व्रत एकादशी, रामदास कह राम ।

रामपंथ संस्थान निज, क्षेत्र धाम परणाम ।।21।।


राम धारणा राम मुख, राम हमारै ध्यान ।

राम संप्रिदा वैष्णव,पूरण ब्रह्मज्ञान ।।22।।


तिलक छाप माला मंत्र, नर नारायण भेष।

मंदिर शालिगराम यह, पूजा परम विशेष ।।23।।


राम बोळाऊ साथ मम, सदा संगी सुखरास।

सजन बंधु बेली कुट्म्ब, राम रतन धन पास ।।24।।


राम आसरो राम पख, दुजा बल नहिं कोय।

पावन पतित दयालुजी, ता शरणै सुख होय ।।25।।


शरणागत प्रतिपालना, पावन पतित कितान।

रामदास विश्वास यह, करणी दिश हैरान ।।26।।

 

आथी पोथी रामजी, उद्यम राम रमाय।

राम दिशावर देश मम, रामाज्ञा सोइ पाय ।।27।।


रामाज्ञा आवत साोई, रामाज्ञा सोई दास।

राम भावना प्रसिद्धता, भवेत रामादास ।।28।।


ज्ञान भक्ति वैराग्य सिधि, क्रिया जोग गुण आद।

राम सता आसक्तिता, वाणी विमल अघाद ।।29।।


मस्तक पर गुरुदेवजी, हृदै विराजै राम।

रामदास दोनू पखोँ, सब विधि पूरण काम ।।30।।


श्वास अघा दम अघा विचै, रक्षक राम दयाल।

रामा राम उचारतां, कदै न व्यापै काल ।।31।।


रक्षा बत्तीसी रामकी, जानत हरि गुरु दास ।

राम सनेही रामदास, आनंद अगम विलास ।।32।।


।। इति श्री रक्षा बत्तीसी ।।


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