श्री गुरु वन्दन स्तोत्र

 

|। राम ।।



।। श्री गुरु वन्दन स्तोत्र ।।

।। छप्पय छन्द ।।

 

राम सत्तगुरु साध, आद परणाम सदाई।

नमस्कार डण्डोत, प्रेम भगतां सुखदाई।

मन वच सेवन पूज्य, सदा चरणां को चेरो।

रामसनेही दास मानज्यो, वन्दन मेरो।

सन्ध्या मध्य प्रभात लूं, सिंवरू सास निकंदना।

द्यालबाल शरणागती, रामजनां कू वन्दना।।1।।

 

अष्ट अंग डण्डोत, होत गति आनन्द आतम ।

पुनि सु प्रकम्मा भाव, चाव गुरु गम परमातम।

शीश नॅवाय लगाय, गुरूपद पंकज परमल 

बहुत भाँति सस्तूति, जोर जुग तगता निर्मल ।

अष्ट जाम पल पल महीं, उदैकार संइ्या सिंवर।

द्यालबाल के उर वसो, श्वास-श्वास गुरु पद विवर।।2।।

 

हरि सरवर जल भाव, मीन शिष क्रीड़ा करही।

प्रेम उमंगा लेत, हेत दूजा परहरही।

मन्न सॉप भ्रम जाल, काल सा कीर न खावत।

निर्भय नित्य निगंज, सुधा सुमिरण रस पावत।

त्रिविध जलन शीतल करण, सुख सागर में रमरह्मा।

रामदास गुरु वन्दना, द्यालबाल शरणा लह्मा।।3।।

 

हरि गुरु सन्त अनन्त, कौन वर्णत यह साखा।

नाम तीन वपु एक, जीभ नभ अक्षर भाखा।

भक्ति विलास प्रकाश, दास हेतारथ कारण।

निरगुण सहगुण रूप, अन्ध अज्ञान विडारण।

शबद रूप परगट नमो, निश्चल सद्गति सिद्ध गुर।

यह स्तोत्र हि मन्त्र को, दास सरोवण वास उर ।।4।।

 

नमो नमो महाराज, लाज मेरी है जाकू।

नमो नमो महाराज, ध्यान धारण उर राखूं।

नमो नमो महाराज,जाप निज मंत्र हमारे।

नमो नमो महाराज, सेव पूजा गुरु तारे 

बाबाजी महाराज को, नाम लेत भवदुःख टरे।

द्यालबाल के प्राणपति, आसवास शिष उद्धरे ।।5।।

  

करुणा सागर की सदा बोलो जय जयकार

करुणा सागर रामजी, करुणा सागर द्याल ।

करुणा सागर ग्रन्थ इम, जीवां कर प्रतिपाल ।।1।।

करुणा सागर धार में, जो भीजे नर नार।

सो प्राणी सहजां हुवे, भवसागर से पार ।।2।।

करुणासागर से करे, जो जन करुण पुकार।

करुणासागर तुरत ही, कर लेते स्वीकार ।।3।।

प्रासादिक या ग्रन्थ से, आधि व्याधि अघ जाय ।

श्रद्धा भक्ती भावयुत, करुणा सागर गाय।।4।।

करुणासागर ग्रन्थ को, करै नित्य जो पाठ।

राम भक्ति उर ऊपजे, थटै सकल सुख थाट ।।5।।

करुणा सागर में भयों, करुणा अमी अपार ।

जो रसनां रस चाखले, जीव होय उद्धार ।।6।।

करुणा सागर की सदा, बोले जय जयकार ।

गुरु-आज्ञा में पगधरो, हो चौरासी पार ।।7।।


करुणासागर ग्रंथ क्या है ? 

 

 अथ ब्रह्म स्तुतीं


अथ रक्षा बत्तीसी


ग्रंथ अरदास बत्तीसी


श्री गुरु वन्दन स्तोत्र


सन्ध्या वन्दन (आरती)


रामस्नेही संप्रदाय खेड़ापा के आचार्य।रामस्नेही संप्रदाय खेड़ापा के महाराज।रामस्नेही संप्रदाय खेड़ापा के गुरु।

 

ग्रन्थ करुणा सागर


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